होम गाइड कैंसरग्रस्त बच्चों के लिए पोषण जीवन और मौत के बीच का एक दायरा

कैंसरग्रस्त बच्चों के लिए पोषण जीवन और मौत के बीच का एक दायरा

आउटलुक टीम | Nov 19, 2019

टीम कडल्स

भारत में हर साल 50,000 से अधिक बच्चे कैंसर से ग्रसित होते हैं। जिनमें से 40 प्रतिशत कुपोषित होते हैं। हम मुंबई स्थित कडल्स फाउंडेशन हैं। एक पुरस्कार विजेता गैर-लाभकारी संस्थान के तौर पर हमारे पास देश भर के पोषण विशेषज्ञों की मजबूत टीम है। हमने भारत के 19 शहरों में 28 सरकारी और चैरिटी कैंसर अस्पतालों के साथ समझौता किया है। पौष्टिकता संबंधी परामर्श का बहुआयादी दृष्टिकोण अपनाकर और इसके लिए मदद के जरिये हम बच्चों में कैंसर से रिकवरी के लिए काम करते हैं क्योंकि पौष्टिक भोजन से बीमारी से राहत मिलती है।

समस्या: कैंसर की भयावहता

भारत में कुपोषित 10 बच्चों में से 8 बच्चों के कैंसर से बचने की संभावना कम होती है। यह एक खतरनाक आंकड़ा है, वो भी यह देखते हुए कि बचपन का कैंसर दुनिया भर में 10 में से 9 बार इलाजयोग्य है। कैंसर इलाज के जरूरतमंद बच्चे अक्सर कुपोषित होते हैं और उपचार से होने वाले कुपोषण से ग्रसित होते हैं, जो कीमोथेरेपी के साइड-इफेक्ट्स की वजह से होता है। इससे बच्चों को सामना करना काफी मुश्किल हो जाता है और उनकी हालत आगे और भी बिगड़ने लगती है, जिस कारण डरकर उनके माता-पिता उपचार को बीच में ही छोड़ देते हैं। वहीं दूसरी ओर, एक पोषित बच्चा कैंसर के इलाज और कैंसर से लड़ने के लिए 86 प्रतिशत अधिक मजबूत होता है।

समाधान: फूड हील्स

हमारा फूड हील्स कार्यक्रम छह साल पहले वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट और पोषण विशेषज्ञों के साथ मिलकर बनाया गया था, जिसका उद्देश्य कैंसर से लड़ने वाले बच्चों को आवश्यक पोषण प्रदान करना है। यह कैंसरग्रस्त बच्चों में कुपोषण का निदान करने और परामर्श प्रदान करने के लिए एक कदम-दर-कदम मार्गदर्शिका है। इस परामर्श के बाद एक सहायता कार्यक्रम भी होता है, जिसमें पौषण पूरक आहार अंडे, फल, ड्राई फ्रूट्स, चार के परिवार को मासिक राशन बास्केट, और अंदर के मरीजों और बाहरी-मरीजों के लिए गर्म भोजन शामिल होता है।

हमारे लोग: पोषण विशेषज्ञ सबसे अहम

पोषण विशेषज्ञ सरकारी अस्पतालों में हमारे फूड हील्स कार्यक्रम की रीढ़ होते हैं। वे वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्टों के साथ मिलकर काम करते हैं ताकि भोजन और दवा साथ-साथ चल सकें। हम स्थानीय रूप से पोषण विशेषज्ञों को नियुक्त करते हैं और अस्पताल में काम शुरू करने से पहले उन्हें बाल चिकित्सा ऑन्कोलॉजी पोषण में प्रशिक्षित करते हैं। पोषण संबंधी परामर्श के अलावा वे माता-पिता की मदद करने के लिए खेल, कहानी, कुक-आउट का भी इस्तेमाल करते हैं ताकि वे अपने परिवार के लिए सही भोजन विकल्प चुन सकें। हम देखभाल करने वालों की मदद के लिए ऐसे उपकरणों और साधनों का इस्तेमाल करते हैं, जिनसे वे अपने भोजन में स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री को शामिल कर सकें। आप सोच रहे होंगे कि यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है? क्योंकि बच्चे केवल तब तक हमारे साथ रहते हैं जब तक उनका इलाज चलता है। लेकिन एक बार जब वह ठीक होकर अपने घर पर वापस चला गया तो यह महत्वपूर्ण है कि माता-पिता उनके अच्छे विकास के लिए सही भोजन विकल्प चुनें।

इनोवेशन: एप और सर्विसेज

हमने अपने फूडहील्स प्रक्रिया को डिजिटल बनाते हुए फूडहील्स एप बनाया है जिससे न्यूट्रीशनिस्ट्स को बच्चों के पोषण की स्थिति पता करने और उनकी आहार योजना बनाने में मदद मिलती है। एप से काउंसिलिंग का समय घटता है और कुपोषण के ग्रेड की गणना में मानवीय गलती होने की संभावना कम होती है और हमें एक दिन में अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचने में मदद मिलती है। फूडहील्स एप वर्तमान में देश भर के 10 अस्पतालों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

प्रभाव: भोजन से दवाई बनती है असरकारी

जिन अस्पतालों में हम काम कर रहे हैं, उनमें से कुछ टाटा मेमोरियल अस्पताल मुंबई, एम्स नई दिल्ली और एनआरसीकोलकाता जैसे संस्थान शामिल हैं। हमने पिछले साल ही 1.5 लाख से ज्यादा मरीजों को परामर्श दी। भारत के सबसे बड़े कैंसर अस्पताल टाटा मेमोरियल सेंटर में हुए एक अध्ययन में यह पाया गया कि योजनाबद्ध पोषण के बाद कैंसर के इलाज वाले बच्चों में 86% प्रतिशत की कमी आई है।

हमारे कार्य के बारे में डॉक्टर क्या कहते हैं, इस पर एक लिंकः

https://www.youtube.com/watch?v=rI_b1UIb-5s

"कडल्स द्वारा प्रदान किए गए समर्थन और दिशानिर्देशों ने हमारे काम को तेजी से बेहतर बनाया है। पोषण जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है। हम हमेशा स्वास्थ्यवर्धक खानपान आदतों और संतुलित आहार पर जोर देते हैं। लेकिन अधिकांश लोगों को इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है कि इसका क्या मतलब है और इसके बारे में कैसे जाना जाए। कडल्स के टीम के सदस्यों ने हमें एहसास कराया कि जब रोगियों का कैंसर का इलाज चल रहा है, ऐसे में संपूर्ण पोषण उपचार के परिणाम के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। जब हम इम्यूनोथेरेपी की बात करते हैं तो बॉडी रिजर्व और इम्यूनिटी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। ऐसे कई उदाहरण हैं जब हमने रोगियों को निकिता मित्रा को रेफर किया है, जो एसजीसीआरआई में कडल बाल चिकित्सा (ओन्को पोषण) विशेषज्ञ हैं, जिन्होने अपने दिल और आत्मा को सेवा में लगा दिया और कई बार गंभीर रूप से कुपोषित रोगी को बचाने में सफलता हासिल की और कैंसर नामक राक्षस पर विजय भी प्राप्त की।"

डा. सोमा डे, डिप्टी इनचार्ज, पीडिएट्रिक ऑक्लोलॉजी, कोलकाता

आगे का रास्ताः ऑनलाइन और ऑफलाइन

फूडहील कार्यक्रम एक प्लग-एंड-प्ले मॉडल है और इसे पूरे भारत के सभी सरकारी/चैरिटी कैंसर अस्पतालों में लागू किया जा सकता है। वर्तमान में हम अपने प्रशिक्षण मॉड्यूल को डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो हम पोषण कॉलेजों को एक विकल्प के रूप में पेश कर सकते हैं ताकि हमारे पास सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में ज्यादा कुशल बाल चिकित्सा (ओन्को न्यूट्रीशनिस्ट) विशेषज्ञ मौजूद हों। हम फूडहील एप को अधिक से अधिक अस्पतालों तक ले जाना चाहते हैं। इस साल हम अपने कार्यक्रम को भारत के दक्षिण और उत्तर-पूर्व के अधिक अस्पतालों में भी उपलब्ध करा रहे हैं। हम अपने परामर्श को ऑनलाइन करने के लिए नेशनल कैंसर ग्रिड भी साथ लाए हैं। हम एक पायलट प्रोग्राम के बारे में सबसे अधिक उत्साहित हैं जो 18-24 वर्ष की श्रेणी में कैंसर से लड़ने वाले युवा वयस्कों की सेवा करेगा।

हम कैसे आगे बढ़ेः हम अकेले नहीं

हमें यहां तक पहुंचाने में बहुत लोगों का हाथ है, जिनका हम धन्यवाद करना चाहते हैं जिनमें हम पर विश्वास करने वाले शुरुआती लोग, पोषण विशेषज्ञ, टाटा मेमोरियल के डॉक्टर जिन्होंने शुरू से हमारा साथ दिया, हमारा बोर्ड, स्टाफ और अंत में हमारे दातदाता जिनके योगदान ने हमारे विचारों को मूर्तरूप देना संभव बनाया। हम विशेष रूप से आउटलुक को धन्यवाद करते हैं जिसने हमें पोषण स्पेशल ज्यूरी अवार्ड फॉर अर्बन न्यूट्रिशन के जरिए हमें पहचान दिलाने के लिए और हमें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए भी।

अधिक जानकारी के लिए देखें www.cuddlesfoundation.org