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ओडिशा के अंगुल की कुपोषण के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी

आउटलुक टीम | Nov 20, 2019

चारुपद्मा पति

ओडिशा के एक दूर-दराज कोने में स्थित लगभग 6,232 वर्ग किमी का एक छोटा सा जिला अंगुल है। एक छोटा जिला, जिसके पास कुपोषण से लड़ने और अपने लोगों को स्वस्थ जीवन की राह दिखाने के प्रयासों के बारे में बताने के लिए एक अद्भूत कहानी है।

अंगुल पूर्व में धेनकनाल और कटक से घिरा हुआ है, उत्तर में देवगढ़, केंदुझर और सुंदरगढ़ जिलों से, पश्चिम में संबलपुर और सोनेपुर, और दक्षिण में बौध और नयागढ़ से। इसमें अधिकांश अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों विशेषकर कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की स्थानीय आबादी है, जो हर तरह से अत्यधिक वंचित है।

स्थानीय समस्या

लंबे समय तक कुपोषण लोगों के जीवन का बहुत ही आम हिस्सा रहा है। अधिकांश महिलाएं अभी भी कुपोषित हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनके बच्चें भी आवश्यक मूल तत्वों से वंचित रह जाते हैं, जबकि एक संतुलित जीवन जीने के लिए ये तत्व बहुत आवश्यकता होते हैं। हालांकि यह जिला एनीमिया, पांच साल छोटे बच्चों के कम वजन और ठिगनापन जैसे मानकों पर बेहतर रहा है, लेकिन कुपोषण अभी भी ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

अंगुल में कुछ खास कारकों ने कुपोषण को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महिलाओं में जागरूकता और साक्षरता की कमी के कारण बच्चों की अच्छी देखभाल नहीं हो पा रही है, जिसके कारण एनीमिया और ठिगनेपन की समस्या ज्यादा होती है। जिले में माताओं को स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में बहुत जानकारी नहीं है, जिनका उन्हें अपने लिए और खासकर अपने बच्चों के लिए आवश्यकता है। वे आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को पंजीकृत करवाकर सेवाएं ले सकती हैं। इसके अलावा, गर्भावस्था और प्रसव के दौरान गलत भोजन प्रथाओं और महिलाओं की उचित देखभाल की कमी ने अंगुल जिले में कुपोषण में व्यापक योगदान दिया है।

पोषण के लिए आंदोलन

गंभीर समस्याओं के बाद आम लोगों के प्रयासों से महिलाओं और बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य एवं पोषण को बढ़ावा देने के लिए एक कार्यक्रम अंगुल पुष्टी अधिकार अभियान (एपीएए यानी आपा) शुरू हुआ। इस अभियान का उद्देश्य जिले की महिलाओं को शिक्षित करना, साथ ही उन्हें पोषण के महत्व का एहसास कराना है।

यह एक ऐसा आंदोलन है जिसने जिले के विभिन्न हिस्सों से 2000 से अधिक लोगों को जोड़ा है, जिनमें सरपंच, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, वार्ड सदस्य और विभिन्न प्रभावशाली लोग शामिल हैं, जो कुपोषण के मुद्दे के समाधान के लिए एक मंच पर साथ आएं हैं। आपा ने अंगुल जिले को कुपोषण के चंगुल से मुक्त कराना सुनिश्चित कर दिया। इसका उद्देश्य आईसीडीएस की सभी प्रमुख योजनाओं जैसे हॉट-कुक्ड मील (एचसीएम), टेक होम राशन (टीएचआर) और बच्चों और माताओं के लिए पूरक पोषण कार्यक्रम (एसएनपी) को लागू करना है।

प्रमुख उद्देश्य

आपा के पांच प्रमुख उद्देश्य

-आंगनवाड़ी केंद्रों के बारे में लोगों की जागरूकता और मांग बढ़ाना।

-तीन प्राथमिक समितियों के माध्यम से आईसीडीएस सेवाओं की निगरानी करना। ये जांच समिति, मातृ समिति और पंचायती राज संस्थान के सदस्यों की समिति है।

-सुविधाओं का लाभ उठाने में असमर्थ लोगों तक पहुंचने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना और उनका समर्थन करना।

-पोषण से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सामुदायिक मंच बनाना।

-चर्चाओं में गांवों के सरपंच की भागीदारी को प्रोत्साहित करना ताकि वे अपने यहां पोषण को बढ़ावा दे सकें।

निगरानी से बदलाव

इस कार्यक्रम को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने और अंगुल के सभी लोगों तक कार्यक्रम की पहुंच सुनिश्चित करवाने वाले अलाभकारी संस्थान स्प्रैड के प्रमुख बिद्युत मोहंती ने बताया कि हमने बच्चों के समग्र विकास की निगरानी करने के लिए जांच समिति का गठन किया है। उन्होंने बताया कि जांच समिति के पास कई जिम्मेदारियां हैं, जिनमें अंगुल के हर बच्चे का स्वस्थ और अच्छा जीवन सुनिश्चित करना, उन्हें स्वास्थ्यवर्धक गरम पके भोजन की सुलभता और सभी का आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकरण सुनिश्चित करना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि समिति में नौ सदस्य होते हैं, जिनमें आंगनवाड़ी सदस्य और कुछ लाभार्थी शामिल हैं।

कुपोषण मिटाने में समिति के सदस्य महत्वपूर्ण हैं। यह सुनिश्चित करने में उनकी बड़ी भूमिका है कि आईसीडीएस सेवाएं बच्चों तक सहज तरीके से पहुंचे। जांच समिति के प्रमुख अन्तर्यामी राउल ने कहा कि जांच के सदस्यों के रूप में हम बच्चों के समुचित विकास की निगरानी के लिए बैठकें करते हैं। हम भोजन की गुणवत्ता और मात्रा को भी देखते हैं।

जांच कमेटी की एक अन्य सक्रिय सदस्य अनीता साहू कहती हैं कि हम यह सुनिश्चित करते हैं कि बच्चों को खाने के लिए मिठाइयां जैसे लड्डू आदि चीजें मिलती रहें, लेकिन जो भी उन्हें मिले, उससे उन्हें पोषण मिलना चाहिए।

अपनाई गई रणनीतियां

सरपंच की अध्यक्षता में बैठकः आपा ने कुपोषण के मुद्दे को समुदाय के समक्ष उठाने और राजनीतिक प्रतिक्रिया लाने के लिए सरपंच की अध्यक्षता में बैठकों को प्रोत्साहित किया।

सरपंच ने आपा सदस्यों के समर्थन से अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में सक्रिय रूप से बैठकें आयोजित कीं। इसका उद्देश्य गरीब बच्चों को पहले अप्राप्त आईसीडीएस की सेवाओं के बारे में जागरूकता पैदा करना था।

शिकायतों को समझना: आईसीडीएस सेवा से संबंधित लाभार्थियों की शिकायतों को दूर करना एक बड़ी समस्या थी। इसलिए जांच और मातृ समितियों के सदस्यों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की बैठकें आयोजित की गईं। सेवाओं का लाभ उठाने में आने वाली अपनी परेशानियां बताने के लिए लाभार्थियों को भी आमंत्रित किया गया।

प्रशिक्षण समिति के सदस्य: निर्णायक समितियों के सदस्यों को उचित प्रशिक्षण दिया गया ताकि वे आईसीडीएस सेवाओं की प्रभावी निगरानी कर सकें और सेवाओं का लाभ उठाने वाले लाभार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त कार्रवाई कर सकें।

पारदर्शिता सुनिश्चित करना: आईसीडीएस दिशानिर्देश आंगनवाड़ी केंद्रों में नाम और तस्वीरें प्रदर्शित करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं, ताकि समुदाय के सदस्यों को जानकारी हो सके कि किससे संपर्क करना है। पहले ऐसा नहीं था। इसलिए आपा ने जांच समिति और मातृ समिति के सदस्यों के नाम और तस्वीर लगाने की नीति को प्रोत्साहित करके प्रणाली में पारदर्शिता लाने का फैसला किया। अब तक आपा लगभग 91 केंद्रों में पारदर्शिता लाने में सफल रहा है।

बाधाओं को दूर करना

आपा अपने कई नए उपायों के माध्यम से जिले में अपने मिशन में काफी हद तक सफल रहा है। ऐसा ही एक उदाहरण है अंगुल ब्लॉक का नंदपुर गांव। अनुपूरक पोषण कार्यक्रम (एसएनपी) के तहत लाभार्थियों को अंडे की सही मात्रा प्रदान करने में आपा के सफल हस्तक्षेप को दर्शाता है जो आईसीडीएस के तहत दी जाने वाली छह सेवाओं में से एक है। इसने यह सुनिश्चित किया है कि नंदपुर में बच्चों और गर्भवती माताओं को उनके सही पोषण को ध्यान में रखते हुए अंडे की आवश्यक मात्रा मिले। आपा के हस्तक्षेप से पहले के लाभार्थियों को टेक होम राशन स्कीम (टीएचआर) के तहत महीने में केवल 10 अंडे मिलते थे और हॉट कुक्ड मील योजना के तहत तीन अंडे मिलते थे। अब आपा के हस्तक्षेप से टीएचआर और एचसीएम योजनाओं के तहत गांव के सभी 60 लाभार्थियों को फायदा मिला।

ओडिशा उन कुछ राज्यों में से एक है जो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, झारखंड, बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के साथ-साथ पोषण का मुकाबला करने के लिए अंडे प्रदान करते हैं। जिले में पल्हारा ब्लॉक के सुबासाही गांव में लगभग 20 लाभार्थियों को एचसीएम का लाभ नहीं मिल रहा था क्योंकि आंगनवाड़ी केंद्र काफी दूर थे। आपा टीम ने लोगों को एचसीएम का लाभ देने के लिए क्षेत्र में सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स (एसएचजी) का सहयोग लिया।

पूर्णता के निकट एक मिशन

समिति के सदस्यों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ आम लोगों के सामूहिक प्रयासों से अंगुल ने कुछ क्षेत्रों में अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है। हालांकि, कुछ अन्य क्षेत्रों में यह अभी भी अन्य तरीकों के साथ-साथ अभिनव तरीकों और सामुदायिक आदानों के माध्यम से कुपोषण को मिटाने का प्रयास जारी है। अंगुल के जिला कलेक्टर मनोज कुमार मोहंती ने जिले के दुर्गम क्षेत्रों में काम करने के लिए और अधिक आंगनवाड़ी केंद्र बनाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा है। वे कुपोषण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए बेहतर रणनीति बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि अंगुल के लोगों को सामूहिक रूप से कुपोषण को दूर करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

अंगुल ओडिशा का पोषण चैंपियन बनने के लिए तैयार है। यह एक सटीक उदाहरण है कि देश के प्रत्येक गांव में सही तरह के हस्तक्षेप और तरीकों के साथ एक और अंगुल बनाया जा सकता है।